पद्मश्री से सम्मानित पुरातत्वविद् डॉ. बुद्ध रश्मि मणि ने बढ़ाया नोएडा का गौरव

टेन न्यूज नेटवर्क

Noida News (26/05/2026): सेक्टर-62 स्थित भारतीय विरासत संस्थान के पूर्व कुलपति तथा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक डॉ. बुद्ध रश्मि मणि को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा पद्मश्री सम्मान प्रदान किए जाने पर नोएडा सहित देशभर के शिक्षाविदों, इतिहासकारों और पुरातत्व विशेषज्ञों में हर्ष का वातावरण है। भारतीय सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण, शोध और ऐतिहासिक तथ्यों के वैज्ञानिक प्रमाण प्रस्तुत करने में उनके दीर्घकालिक योगदान को यह राष्ट्रीय सम्मान मिला है।

डॉ. मणि ने वर्षों तक भारतीय सभ्यता, संस्कृति और ऐतिहासिक स्थलों पर गहन अध्ययन और उत्खनन कार्य किए। उनका मानना है कि किसी भी देश की असली पहचान उसकी सांस्कृतिक विरासत से होती है और धरोहरों का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का सबसे सशक्त माध्यम है। वे अक्सर कहते रहे हैं कि “विरासत की रक्षा ही सच्चे अर्थों में राष्ट्र निर्माण है।”

राम जन्मभूमि विवाद से जुड़े मामले में वर्ष 2003 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्देश पर हुए पुरातात्विक उत्खनन में डॉ. बुद्ध रश्मि मणि ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम का नेतृत्व किया था। उनके निर्देशन में की गई वैज्ञानिक खुदाई में मंदिर स्थापत्य से संबंधित कई महत्वपूर्ण अवशेष प्राप्त हुए। इनमें स्तंभों के आधार, प्राचीन संरचनाएं और अभिलेख शामिल थे, जिन्होंने न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इतिहासकारों के अनुसार, इस उत्खनन ने भारतीय पुरातत्व के क्षेत्र में वैज्ञानिक पद्धति की विश्वसनीयता को मजबूत किया और ऐतिहासिक तथ्यों को प्रमाणिक रूप से सामने लाने का कार्य किया। डॉ. मणि ने केवल अयोध्या ही नहीं, बल्कि देश के अनेक महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों पर भी उत्खनन और शोध कार्यों का नेतृत्व किया। इनमें दिल्ली का लालकोट और सलीमगढ़, हरियाणा का कुणाल, उत्तर प्रदेश का संकिसा और सिसवनिया तथा जम्मू-कश्मीर का अंबारन प्रमुख हैं।

उनके नेतृत्व में किए गए शोध कार्यों ने भारतीय इतिहास की कई नई जानकारियों को सामने लाने में सहायता की। पुरातत्व विशेषज्ञों का मानना है कि उन्होंने आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक अध्ययन के माध्यम से भारतीय इतिहास को अधिक प्रमाणिक और व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत किया।

भारतीय विरासत संस्थान में कुलपति रहते हुए डॉ. बुद्ध रश्मि मणि ने विरासत संरक्षण, सांस्कृतिक अध्ययन और पुरातात्विक अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल कीं। उनके मार्गदर्शन में विद्यार्थियों और शोधार्थियों को भारतीय इतिहास और संस्कृति को व्यावहारिक तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझने का अवसर मिला।

पद्मश्री से पूर्व भी डॉ. मणि को कई राष्ट्रीय और शैक्षणिक सम्मानों से नवाजा जा चुका है। वर्ष 2017 में उन्हें आजीवन उपलब्धि सम्मान प्रदान किया गया था। इसके अलावा वर्ष 2023 में उन्हें शारदा शताब्दी सम्मान तथा भारतीय बौद्ध अध्ययन समाज की ओर से मंजूश्री सम्मान से सम्मानित किया गया। शिक्षा और संस्कृति से जुड़े लोगों का कहना है कि डॉ. बुद्ध रश्मि मणि को मिला यह सम्मान देश में सांस्कृतिक विरासत संरक्षण और पुरातात्विक अनुसंधान के क्षेत्र में कार्य कर रहे लोगों के लिए प्रेरणास्रोत साबित होगा।

पैरालंपियन और गोल्ड मेडलिस्ट प्रवीण कुमार ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा Pragyan Public School , Jewar से प्राप्त की, जहाँ वे कक्षा 12 तक छात्र रहे। इसके साथ ही वे ग्रेटर नोएडा स्थित Galgotias University में ग्रेजुएशन के छात्र भी रहे हैं।

प्रवीण कुमार आज युवाओं और खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत एवं रोल मॉडल बन चुके हैं। अपनी मेहनत, संघर्ष और अनुशासन के दम पर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का गौरव बढ़ाया है तथा यह साबित किया है कि दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

 


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