IHGF Delhi Fair 2026: भारतीय हस्तशिल्प की वैश्विक मांग बढ़ी, खरीदारों ने उत्पादों की विविधता और कारीगरी को सराहा

टेन न्यूज नेटवर्क

Greater Noida News (16 अक्टूबर 2026): इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट, ग्रेटर नोएडा में आयोजित 62वें आईएचजीएफ दिल्ली मेला–ऑटम 2026 में देश-विदेश से आए खरीदार भारतीय हस्तशिल्प, पारंपरिक कारीगरी और आधुनिक डिजाइनों की विविधता से प्रभावित नजर आ रहे हैं। 13 से 17 अक्टूबर तक आयोजित इस मेले में लंबे समय से जुड़े खरीदारों और आपूर्तिकर्ताओं के साथ पहली बार पहुंचे व्यापारिक आगंतुकों की भी उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिल रही है। खरीदारों ने मेले को एक शानदार अनुभव बताते हुए उत्पादों की व्यापक श्रृंखला, नए आपूर्तिकर्ताओं से संपर्क और पारंपरिक शिल्प की विशिष्टता की सराहना की।

मेले में 3,000 से अधिक प्रदर्शक, 900 स्थायी शोरूम, थीम आधारित प्रस्तुतियां, लाइव क्राफ्ट प्रदर्शन और विभिन्न ज्ञान सत्र शामिल हैं। भारतीय हस्तशिल्प की समृद्ध परंपरा, विविध कच्चे माल और क्षेत्रीय सांस्कृतिक विरासत पर आधारित उत्पादों के माध्यम से निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पहुंच बढ़ाने का अवसर मिल रहा है।

होम डेकोर से लेकर फर्नीचर तक, खरीदारों की बढ़ी रुचि

हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएच) के चेयरमैन डॉ. नीरज खन्ना ने कहा कि मेले के चार दिनों के दौरान प्रदर्शकों और खरीदारों के बीच व्यापक व्यावसायिक संवाद हुआ है। होम डेकोर, गिफ्टिंग, लाइफस्टाइल, फैशन, फर्निशिंग, फर्नीचर और इंटीरियर उत्पादों की विभिन्न श्रेणियों में खरीदारों ने मजबूत रुचि दिखाई है।

उन्होंने बताया कि फर्नीचर क्षेत्र में ऐसे उत्पादों की मांग प्रमुखता से सामने आई है, जो उपलब्ध स्थान के अनुरूप होने के साथ आरामदायक, उपयोगी और आधुनिक जीवनशैली के अनुकूल हों।

इस संस्करण में डिजाइन के स्तर पर टिकाऊपन, पारंपरिक कारीगरी, आकर्षक प्रिंट, प्राकृतिक बनावट और आधुनिक सौंदर्यबोध का बेहतर समन्वय देखने को मिल रहा है। आधुनिक घरों के अनुरूप तैयार किए गए विशिष्ट उत्पादों के साथ विभिन्न श्रेणियों और कीमतों में उपलब्ध विकल्पों ने अलग-अलग जरूरतों वाले खरीदारों को आकर्षित किया है।

प्राकृतिक सामग्री और हस्तनिर्मित सजावटी उत्पादों की मांग

ईपीसीएच के मुख्य संरक्षक और इंडिया एक्सपोजिशन मार्ट लिमिटेड (आईईएमएल) के चेयरमैन डॉ. राकेश कुमार ने कहा कि उपभोक्ताओं की प्राथमिकताएं अब ऐसे उत्पादों की ओर बढ़ रही हैं, जो आराम, संतुलन और भावनात्मक जुड़ाव का अनुभव प्रदान करते हैं।

उन्होंने कहा कि प्राकृतिक सामग्री, आकर्षक बनावट, वास्तविक हस्तकला और प्रकृति से प्रेरित डिजाइन का महत्व लगातार बढ़ रहा है। भारतीय निर्माता इन क्षेत्रों में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर रहे हैं।

डॉ. राकेश कुमार के अनुसार, होम डेकोर में हस्तनिर्मित वस्तुओं, वॉल आर्ट, भित्तिचित्रों और मूर्तिकला आधारित सजावटी उत्पादों की भूमिका बढ़ रही है। ऐसे उत्पाद घरों को अधिक व्यक्तिगत और आकर्षक बनाने के साथ उनमें प्रकृति तथा पारंपरिक कारीगरी का एहसास भी जोड़ते हैं।

लाइव क्राफ्ट प्रदर्शन ने आगंतुकों को किया आकर्षित

ईपीसीएच के उपाध्यक्ष सागर मेहता ने बताया कि मेले में विभिन्न प्रदर्शकों द्वारा आयोजित लाइव क्राफ्ट प्रदर्शनों को आगंतुकों ने खूब सराहा। इन प्रदर्शनों के माध्यम से खरीदारों को पारंपरिक तकनीकों, कारीगरों के कौशल और हस्तनिर्मित उत्पाद तैयार करने की प्रक्रिया को करीब से देखने का अवसर मिला।

उन्होंने कहा कि कई आगंतुकों ने स्वयं भी इन तकनीकों को आजमाया और उत्पाद निर्माण से जुड़ी रचनात्मकता का अनुभव किया। इस तरह के प्रदर्शन भारतीय हस्तशिल्प की परंपरा और कारीगरों की दक्षता को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के सामने प्रस्तुत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस और जापान के खरीदारों ने सराहे भारतीय उत्पाद

मेले में शामिल अंतरराष्ट्रीय खरीदारों ने भारतीय हस्तशिल्प की विविधता और गुणवत्ता को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी।

अमेरिका से आईं खरीदार डीन ऐशले ने अमेरिकी बाजार के लिए भारतीय वस्त्रों, हस्तनिर्मित उत्पादों और पारंपरिक कारीगरी में रुचि दिखाई। उन्होंने फर्नीचर और अन्य उत्पादों का भी जायजा लिया।

ऑस्ट्रेलिया से आए जेक व्हीलर ने मेले को शानदार अनुभव बताया। फेस्टिवल उत्पादों के विशेषज्ञ व्हीलर पहली बार इस आयोजन में शामिल हुए हैं।

फ्रांस से आईं एमिली ने टेबलवेयर, फर्नीचर तथा लकड़ी और लोहे से बने उत्पादों को देखा। उन्होंने उत्पादों की विविधता और नए आपूर्तिकर्ताओं से संपर्क स्थापित करने के अवसर की सराहना की।

वहीं, जापान से आईं तोमोको इदा ने रचनात्मक डिजाइन और उत्कृष्ट कारीगरी वाले संग्रहों में रुचि दिखाई। उनके लिए होम डेकोर में इस्तेमाल होने वाले कपास, जूट और लिनेन जैसे प्राकृतिक रेशों से बने उत्पाद विशेष आकर्षण का केंद्र रहे।

भारतीय कारीगरी को वैश्विक बाजार में मिली विशिष्ट पहचान

नीदरलैंड से आए खरीदार अरेंड मोस्टर्ड ने कई संस्करणों के बाद दोबारा मेले में भाग लिया। उन्होंने नए हॉल, प्रदर्शकों की विविधता और उत्पादों की विस्तृत श्रृंखला की प्रशंसा की। गार्डन उत्पादों में विशेषज्ञता रखने वाले मोस्टर्ड ने विभिन्न सामग्रियों से तैयार व्यावहारिक, गुणवत्तापूर्ण और बाजार की मांग के अनुरूप उत्पादों का अवलोकन किया।

उन्होंने बताया कि वे चीन में आयोजित मेलों में भी जाते हैं, लेकिन भारत की विशिष्ट सामग्री और पारंपरिक कारीगरी, खासकर धातु शिल्प, की बराबरी करने वाले उत्पाद अन्य बाजारों में तलाशना मुश्किल है। उन्होंने यह भी कहा कि नीदरलैंड के ग्राहकों के बीच भारतीय कालीनों और वस्त्रों की अच्छी मांग है।

एफटीए और निर्यात संवर्धन मिशन पर विशेष सत्र

आईएचजीएफ दिल्ली मेला–ऑटम 2026 की स्वागत समिति के अध्यक्ष अवधेश अग्रवाल ने बताया कि मेले के अंतर्गत आयोजित ज्ञान सत्रों में हस्तशिल्प निर्यातकों के लिए व्यापार विस्तार और बाजार विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।

‘इंडियाज एफटीए मोमेंट’ विषय पर आयोजित सत्र में भारत के मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के माध्यम से बाजार तक पहुंच, मूल्य श्रृंखला के एकीकरण और प्रतिस्पर्धी सोर्सिंग के अवसरों पर विचार-विमर्श किया गया। विशेषज्ञों ने निर्यातकों को टैरिफ, मूल के नियमों और बाजार चयन की रणनीतियों के बारे में जानकारी दी।

इसके अतिरिक्त, ‘एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन’ पर आयोजित सत्र में निर्यातकों के लिए वित्तीय सहायता, बाजार विकास और निर्यात संवर्धन से जुड़े अवसरों पर मार्गदर्शन दिया गया। इन सत्रों का उद्देश्य भारतीय हस्तशिल्प निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी उपस्थिति मजबूत करने और उपलब्ध सहायता योजनाओं का लाभ उठाने के लिए तैयार करना था।

कारीगरों के कौशल विकास और उत्पाद नवाचार पर जोर

ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक राजेश रावत ने कहा कि परिषद कारीगरों और बुनकरों को प्रशिक्षण, कौशल विकास, उत्पाद नवाचार, विपणन तथा ऑर्डर पूरा करने की प्रक्रिया में सहयोग प्रदान कर रही है।

इसी क्रम में मेले के दौरान कारीगरों और बुनकरों के लिए विशेष मार्गदर्शन सत्र आयोजित किया गया। इसमें उत्पाद विकास, ब्रांडिंग और विजुअल मर्चेंडाइजिंग पर ध्यान केंद्रित किया गया, ताकि उत्पादों की बाजार में अपील बढ़ाई जा सके और उन्हें वैश्विक बाजारों की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जा सके।

ईपीसीएच के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत से हस्तशिल्प का कुल निर्यात 33,168 करोड़ रुपये यानी 3,754 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा।

परिषद देश से विभिन्न अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक हस्तशिल्प निर्यात को बढ़ावा देने और भारत को उच्च गुणवत्ता वाले हस्तशिल्प के विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम कर रही है।

62वां आईएचजीएफ दिल्ली मेला–ऑटम 2026 भारतीय कारीगरों, निर्माताओं और निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से जोड़ने का महत्वपूर्ण मंच बना हुआ है। मेले में पारंपरिक शिल्प, टिकाऊ सामग्री, आधुनिक डिजाइन और वैश्विक बाजार की जरूरतों के बीच बेहतर तालमेल भारतीय हस्तशिल्प क्षेत्र के लिए नए व्यावसायिक अवसरों की संभावनाओं को रेखांकित करता है।


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