IHGF Delhi Fair में सस्टेनेबल उत्पादों की धूम, अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की बढ़ी दिलचस्पी
टेन न्यूज नेटवर्क
ग्रेटर नोएडा (15 अक्टूबर 2026): इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट, ग्रेटर नोएडा में आयोजित 62वें आईएचजीएफ दिल्ली मेले–ऑटम 2026 में अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है। मेले में सस्टेनेबल इनोवेशन, प्राकृतिक सामग्री, विभिन्न सामग्रियों के मिश्रण से तैयार उत्पादों और हस्तनिर्मित कलाकृतियों को खरीदारों की सराहना मिल रही है। आयोजकों के अनुसार, मेले के शुरुआती तीन दिनों में पुराने और नए खरीदारों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली, जिससे उत्पादों की सोर्सिंग, पूछताछ और ऑर्डर देने की गतिविधियों में तेजी आई है।
13 से 17 अक्टूबर 2026 तक आयोजित इस मेले में भारतीय हस्तशिल्प, होम डेकोर, फर्नीचर, फर्निशिंग, फैशन एक्सेसरीज और लाइफस्टाइल उत्पादों की विस्तृत श्रृंखला प्रदर्शित की गई है। इसके साथ ही प्रदर्शक-क्रेता बैठकों, निर्यातकों के लिए डिजिटल मार्केटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़े सत्रों तथा यूरोपीय बाजार के अनुपालन संबंधी कार्यक्रमों ने प्रतिभागियों का ध्यान आकर्षित किया।
कपड़ा मंत्रालय की सचिव और हस्तशिल्प विकास आयुक्त ने किया दौरा
भारत सरकार के कपड़ा मंत्रालय की सचिव श्रीमती नीलम शामी राव और हस्तशिल्प विकास आयुक्त श्रीमती अमृत राज ने 62वें आईएचजीएफ दिल्ली मेले–ऑटम 2026 का दौरा किया। दोनों अधिकारियों ने मेले में प्रदर्शित उत्पादों की विविधता और भारतीय हस्तशिल्प को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने के प्रयासों की सराहना की।
कपड़ा मंत्रालय की सचिव नीलम शामी राव ने कहा कि आईएचजीएफ दिल्ली मेला एक महत्वपूर्ण वैश्विक सोर्सिंग मंच के रूप में विकसित हुआ है, जो भारतीय निर्माताओं, निर्यातकों, कारीगरों और बुनकरों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से जोड़ता है।
उन्होंने कहा कि भारतीय हस्तशिल्प क्षेत्र देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने के साथ रोजगार सृजन, ग्रामीण आजीविका और कारीगरों, एमएसएमई तथा उद्यमियों को वैश्विक बाजारों तक पहुंच प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएच) के प्रयासों की सराहना करते हुए उम्मीद जताई कि मेले से विभिन्न उत्पाद श्रेणियों में बाजार संपर्क मजबूत होंगे और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।
हस्तशिल्प विकास आयुक्त अमृत राज ने भी ईपीसीएच के प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन हस्तशिल्प निर्यातकों, स्टार्टअप्स और शिल्प उद्यमियों को भारतीय कला, शिल्प विरासत और रचनात्मकता को वैश्विक बाजारों के सामने प्रस्तुत करने का अवसर देते हैं।
उन्होंने प्रदर्शकों से आग्रह किया कि वे अपनी शिल्पकला की प्रामाणिकता और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखते हुए नवाचार, गुणवत्ता और टिकाऊ कार्यप्रणालियों को अपनाएं, ताकि बदलती बाजार आवश्यकताओं के अनुरूप क्षेत्र का विकास हो सके।

सस्टेनेबल उत्पादों और नए डिजाइनों ने खींचा खरीदारों का ध्यान
ईपीसीएच के अध्यक्ष डॉ. नीरज खन्ना ने कहा कि मेले के पहले तीन दिनों में नियमित खरीदारों के साथ बड़ी संख्या में नए खरीदार भी पहुंचे हैं। इनमें कई खरीदार पुराने और नए, दोनों तरह के आपूर्तिकर्ताओं को ऑर्डर देने में रुचि दिखा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि ईपीसीएच और इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट की ओर से तैयार किए गए कारोबारी मंच के माध्यम से अनुभवी अंतरराष्ट्रीय खरीदार भारतीय हस्तशिल्प निर्यातकों की नई पीढ़ी के साथ भी व्यावसायिक संबंध स्थापित कर रहे हैं।
डॉ. खन्ना के अनुसार, प्रदर्शकों ने कॉटन और जूट से बने लाइफस्टाइल उत्पादों, प्राकृतिक रंगों से तैयार और हाथ से पेंट किए गए वस्त्रों, पुनर्चक्रित कपड़े एवं कागज से बने सजावटी उत्पादों तथा पौधों के रेशों से तैयार फैशन एक्सेसरीज की आकर्षक श्रृंखला प्रस्तुत की है। पर्यावरण के प्रति जागरूकता को ध्यान में रखकर तैयार किए गए इन उत्पादों में खरीदारों ने विशेष रुचि दिखाई है।
अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस और एशियाई देशों से पहुंचे खरीदार
मेले में अंतरराष्ट्रीय बाजारों के साथ भारतीय घरेलू खरीदारों की भी अच्छी भागीदारी देखने को मिली। ईपीसीएच के महानिदेशक की भूमिका में मुख्य संरक्षक और आईईएमएल के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि अमेरिका, रूसी संघ, यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया के अलावा ताइवान, चीन और जापान जैसे एशियाई बाजारों से खरीदार पहुंचे हैं।
उन्होंने बताया कि खरीदारों की रुचि होम डेकोर, फर्नीचर, वस्त्र, फैशन एक्सेसरीज और लाइफस्टाइल उत्पादों की विभिन्न श्रेणियों में देखने को मिली।
रूसी संघ से आईं इरीना एलिसेवा घरेलू सजावट, लाइटिंग और धातु उत्पादों की सोर्सिंग कर रही हैं। वहीं, यूनाइटेड किंगडम के नियमित खरीदार इयान स्नो फर्नीचर और ब्लॉक-प्रिंटेड उत्पादों की खरीद में रुचि दिखा रहे हैं। उनके आयात में भारत की हिस्सेदारी लगभग 85 प्रतिशत बताई गई है।
ब्रिटेन के ही माइकल टेलर हस्तनिर्मित फर्नीचर की तलाश में मेले में पहुंचे हैं। जर्मनी के पीटर ज़ुर्न विशिष्ट इंटीरियर डेकोर संग्रहों की सोर्सिंग कर रहे हैं, जबकि जुर्गन राइटर फर्नीचर, लाइटिंग और एक्सेसरीज की खरीद कर रहे हैं। जुर्गन राइटर के अनुसार, मेले में भागीदारी से उनके कारोबार में 10 से 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
फ्रांस की सिल्वियान शैट्री फर्नीचर की सोर्सिंग कर रही हैं और उनके आयात में भारत की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत है। ताइवान से आईं ऐनी महिलाओं के परिधानों और फर्निशिंग के लिए भारतीय वस्त्रों से प्रेरणा ले रही हैं। वहीं, जापान के हिदेकी हयावाका टोट बैग और सिलाई से जुड़े उत्पादों की तलाश में हैं तथा भारत से अपनी खरीद बढ़ाने की योजना बना रहे हैं।
ईपीसीएच के उपाध्यक्ष सागर मेहता ने कहा कि खरीदारों की रुचि और उनकी प्रतिक्रियाएं भारतीय हस्तशिल्प, उत्पाद विविधता और डिजाइन-आधारित संग्रहों के लिए भारत के महत्व को रेखांकित करती हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार का विस्तार करने और दीर्घकालिक व्यावसायिक संबंधों को मजबूत करने के अवसर मिलते हैं।
एआई, डिजिटल विजिबिलिटी और यूरोपीय नियमों पर विशेष सत्र
मेले के दौरान निर्यातकों को बदलती वैश्विक कारोबारी जरूरतों से परिचित कराने के लिए कई संगोष्ठियों और विशेष सत्रों का आयोजन किया गया।
आईएचजीएफ दिल्ली मेला–ऑटम 2026 की स्वागत समिति के अध्यक्ष अवधेश अग्रवाल ने बताया कि इन सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को डिजिटल मार्केटिंग, वैश्विक बाजारों में उत्पादों की दृश्यता बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुपालन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं।
‘ऑनलाइन विजिबिलिटी टू वेरिफाइड ऑर्डर: एआई, जीईओ और एईओ फॉर एक्सपोर्ट्स’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में निर्यातकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (जीईओ) और आंसर इंजन ऑप्टिमाइजेशन (एईओ) के उपयोग के बारे में जानकारी दी गई। इसका उद्देश्य डिजिटल उपस्थिति मजबूत करना, वैश्विक खरीदारों के बीच भरोसा बढ़ाना और ऑनलाइन पूछताछ को वास्तविक निर्यात ऑर्डर में बदलने की संभावनाओं को बेहतर बनाना था।
इसके अतिरिक्त, यूरोपीय संघ के डीफॉरेस्टेशन रेगुलेशन (ईयूडीआर) अनुपालन और सप्लाई चेन ट्रेसेबिलिटी पर आयोजित सत्र में निर्यातकों को संबंधित नियमों, जोखिम मूल्यांकन, दस्तावेजीकरण और आपूर्ति श्रृंखला में उत्पादों की उत्पत्ति का पता लगाने की प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई।
यूरोपीय संघ के पैकेजिंग एवं पैकेजिंग वेस्ट रेगुलेशन से संबंधित कार्यक्रम में भी निर्यातकों को बदलती पैकेजिंग आवश्यकताओं और टिकाऊ पैकेजिंग के दृष्टिकोण से अवगत कराया गया, ताकि वे यूरोपीय बाजार की जरूरतों के अनुरूप अपनी तैयारियां कर सकें।
मेले की सुविधाओं और कारोबारी माहौल को मिली सराहना
ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक राजेश रावत ने कहा कि सुहावने मौसम और मेले के उत्साहपूर्ण माहौल ने क्रेता-प्रदर्शक संवाद को और बेहतर बनाया है। खरीदार अपने नियमित आपूर्तिकर्ताओं से दोबारा जुड़ने के साथ नए उत्पादों और संभावित कारोबारी साझेदारियों की तलाश भी कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि खरीदारों और आगंतुकों ने आयोजन की सुविधाओं, प्रदर्शित उत्पादों की विविधता और व्यापार करने की सरलता को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है।
मेले का उद्देश्य भारतीय हस्तशिल्प उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने, निर्यातकों को नए खरीदारों से जोड़ने और भारत को उच्च गुणवत्ता वाले हस्तशिल्प के विश्वसनीय वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करने के प्रयासों को गति देना है।

33,168 करोड़ रुपये रहा हस्तशिल्प निर्यात
ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक राजेश रावत ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान भारत से हस्तशिल्प का कुल निर्यात 33,168 करोड़ रुपये (3,754 मिलियन अमेरिकी डॉलर) रहा।
ईपीसीएच देश से विभिन्न अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक हस्तशिल्प निर्यात को बढ़ावा देने और भारतीय उत्पादों की वैश्विक पहचान मजबूत करने के लिए कार्यरत प्रमुख संस्थानों में शामिल है। 62वें आईएचजीएफ दिल्ली मेले–ऑटम 2026 के माध्यम से परिषद को उम्मीद है कि भारतीय हस्तशिल्प उत्पादों के लिए नए बाजार संपर्क विकसित होंगे, निर्यातकों को कारोबारी अवसर मिलेंगे और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के साथ दीर्घकालिक संबंध मजबूत होंगे।
62वां आईएचजीएफ दिल्ली मेला–ऑटम 2026, 17 अक्टूबर तक इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट, ग्रेटर नोएडा में आयोजित किया जा रहा है।
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