New Delhi News (15 October 2026): दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद करने के मामले में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी है। उन्होंने अदालत में हलफनामा दाखिल कर कहा कि 9 अक्टूबर के आदेश का जानबूझकर उल्लंघन नहीं किया गया। गृह सचिव ने स्पष्ट किया कि अफवाहों को फैलने से रोकने, सार्वजनिक शांति बनाए रखने और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने से बचाने के लिए यह कदम उठाया गया था।
गोविंद मोहन ने अपने हलफनामे में रायसीना हिल के चार किलोमीटर के दायरे में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को एक दिन के लिए निलंबित करने के फैसले का बचाव किया। उन्होंने कहा कि निर्धारित भौगोलिक क्षेत्र में सीमित समय के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद करना सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए परिस्थितियों के अनुसार अपनाया जाने वाला उपाय है। हलफनामे के मुताबिक, 9 अक्टूबर 2026 को रात 11 बजे से 10 अक्टूबर 2026 को रात 11 बजे तक संबंधित क्षेत्र में केवल सेलुलर इंटरनेट सेवाएं निलंबित की गई थीं।
हलफनामे में यह भी स्पष्ट किया गया कि इंटरनेट बंद करने का फैसला केवल मोबाइल इंटरनेट सेवाओं तक सीमित था। गैर-सेलुलर इंटरनेट सेवाओं, वाई-फाई और ब्रॉडबैंड कनेक्शन पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया था। गृह सचिव ने अदालत से अनुरोध किया कि वह अपने 11 अक्टूबर के आदेश में संशोधन करे, ताकि भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर लागू कानूनों और निर्धारित सुरक्षा उपायों के तहत इंटरनेट सेवाओं को निलंबित किया जा सके। उन्होंने अदालत से अपने खिलाफ जारी अवमानना नोटिस को खारिज करने की भी अपील की।
यह मामला मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 11 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन को दिल्ली पुलिस द्वारा नाकाम किए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व आदेश के कथित उल्लंघन को लेकर केंद्रीय गृह सचिव, दिल्ली पुलिस आयुक्त और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) के चेयरपर्सन को अवमानना नोटिस जारी किया था। गृह सचिव के हलफनामे के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने 10 अक्टूबर को रात 10 बजे तक एक दिन के लिए मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद करने का अनुरोध किया था, जिस पर कानून के मुताबिक विचार किया गया।
मामले में केंद्रीय गृह सचिव ने अदालत से कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी तरह की अशांति रोकने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया था। उन्होंने आग्रह किया कि अवमानना नोटिस पर विचार करते समय इन तथ्यों को ध्यान में रखा जाए। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ 15 अक्टूबर को इस मामले में अवमानना याचिका पर सुनवाई करेगी। अब सुनवाई के दौरान अदालत का रुख महत्वपूर्ण होगा कि इंटरनेट सेवाओं पर लगाए गए प्रतिबंध और पूर्व आदेश के कथित उल्लंघन को लेकर क्या फैसला लिया जाता है।
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