दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के बीच सरकार का बड़ा फैसला, कितने दिनों तक राजधानी में तैनात रहेंगे CAPF के जवान
टेन न्यूज़ नेटवर्क
New Delhi News (13 October 2026): दिल्ली में लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शनों और आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए केंद्र सरकार ने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा फैसला लिया है। गृह मंत्रालय ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की 221 कंपनियों की तैनाती अगले 30 दिनों तक बढ़ाने का निर्णय किया है। इन कंपनियों में करीब 26 हजार जवान शामिल हैं, जो कानून-व्यवस्था बनाए रखने में दिल्ली पुलिस और स्थानीय प्रशासन की सहायता करेंगे। यह फैसला गृह मंत्रालय में हुई सुरक्षा समीक्षा बैठक के बाद लिया गया है। राजधानी में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय बलों की तैनाती बढ़ाने को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दिल्ली में केंद्रीय बलों की तैनाती को लेकर 8 से 12 अक्टूबर के बीच व्यवस्था की गई थी। इसमें पहले से राजधानी में तैनात 111 कंपनियों के अतिरिक्त 10 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शन से पहले मंजूर की गई 110 कंपनियां भी शामिल थीं। अब इन बलों की तैनाती को अगले 30 दिनों तक जारी रखने का फैसला किया गया है। जवानों को सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने, संवेदनशील इलाकों की सुरक्षा करने और जंतर-मंतर, संसद तथा मध्य दिल्ली के अन्य हिस्सों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की जिम्मेदारी दी गई है। इनकी सहायता से प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रदर्शनकारियों के प्रवेश को रोकने और किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से निपटने की तैयारी की जा रही है।
केंद्रीय बलों की अतिरिक्त टुकड़ियों में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की 85 कंपनियां, सशस्त्र सीमा बल (SSB) की 10 कंपनियां, रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की सात कंपनियां, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) की सात कंपनियां और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की एक कंपनी शामिल है। इन जवानों को जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ समेत देश के विभिन्न हिस्सों से दिल्ली लाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय बलों की आवाजाही के लिए छह विशेष ट्रेनों का इस्तेमाल किया गया। प्रत्येक कंपनी में लगभग 120 से 130 जवान होते हैं। हाल के वर्षों में विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्था के लिए दिल्ली में केंद्रीय बलों की यह बड़ी तैनातियों में से एक बताई जा रही है।
10 अक्टूबर के प्रदर्शन के बाद भी राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बनी रही। रविवार को भी दिल्ली के अलग-अलग स्थानों पर छोटे समूहों में विरोध प्रदर्शन होने की जानकारी सामने आई। सुरक्षा विशेषज्ञ और CRPF के पूर्व महानिरीक्षक आरके यादव के अनुसार, केंद्रीय बलों को वापस बुलाने का निर्णय जमीनी हालात, संभावित सुरक्षा खतरे और दिल्ली पुलिस की स्थिति संभालने की क्षमता के आकलन के आधार पर लिया जाएगा। बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश, निर्धारित प्रदर्शन स्थलों से बाहर भीड़ जुटने की आशंका और अचानक होने वाले प्रदर्शनों जैसी परिस्थितियां भी सुरक्षा योजना को प्रभावित कर सकती हैं। अधिकारियों के स्तर पर स्थिति की समय-समय पर समीक्षा किए जाने की बात कही गई है।
हालांकि, राजधानी में केंद्रीय बलों की तैनाती बढ़ाने के साथ दूसरे क्षेत्रों में सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियों का संतुलन बनाए रखना भी चुनौती है। आरके यादव ने बताया कि CRPF के कुछ जवानों को उग्रवाद विरोधी अभियानों और अन्य सुरक्षा कार्यों वाले क्षेत्रों से वापस बुलाकर दिल्ली में लगाया गया था। ऐसे में अतिरिक्त बलों को लंबे समय तक राजधानी में बनाए रखने से अन्य स्थानों पर जवानों की तैनाती, रोटेशन और मानव संसाधन की योजना प्रभावित हो सकती है। वहीं, सुरक्षा स्थिति का आकलन किए बिना सभी अतिरिक्त कंपनियों को एक साथ वापस बुलाने से अचानक होने वाले प्रदर्शनों से निपटने की क्षमता पर असर पड़ सकता है। ऐसे में अगले 30 दिनों के दौरान केंद्रीय बलों की तैनाती और उनकी वापसी का फैसला राजधानी की कानून-व्यवस्था तथा सुरक्षा जरूरतों की समीक्षा के आधार पर किए जाने की संभावना है।
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