ग्रेटर नोएडा के किसानों को 64.70% अतिरिक्त मुआवजे की उम्मीद, लंबित मामलों के निस्तारण का रास्ता साफ

टेन न्यूज नेटवर्क

Greater Noida News (13/10/2026): ग्रेटर नोएडा में वर्ष 2002 से 2013 के बीच अधिग्रहित जमीन के बदले 64.70 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजे का इंतजार कर रहे किसानों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। उत्तर प्रदेश सरकार के स्पष्टीकरण के बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के लिए पात्रता की शर्तें पूरी करने वाले किसानों के लंबित मामलों पर नियमानुसार निर्णय लेने का रास्ता खुल गया है। सोमवार को विभिन्न गांवों के किसानों ने जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह से मुलाकात कर इस पहल के लिए सरकार के प्रति आभार जताया।

सरकार के स्पष्टीकरण से उन किसानों को उम्मीद जगी है, जिन्हें जमीन अधिग्रहण के बावजूद अब तक 64.70 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजे का लाभ नहीं मिल पाया है। अब संबंधित मामलों में प्राधिकरण मौजूदा नियमों के तहत आगे की कार्रवाई कर सकता है। हालांकि, मुआवजे का लाभ पात्रता और निर्धारित नियमों के आधार पर ही मिलेगा। प्रत्येक मामले में दस्तावेजों की जांच और आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति जताया आभार

जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह ने किसानों की समस्या के समाधान की दिशा में किए गए प्रयासों के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पात्र किसानों को उनका अधिकार मिलना चाहिए और अतिरिक्त मुआवजे से जुड़े लंबित मामलों का निस्तारण नियमानुसार किया जाना जरूरी है।

विधायक ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों से अपेक्षा जताई कि वे किसानों के दावों की पारदर्शी तरीके से जांच करें और लंबित प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि किसानों को उनका हक दिलाने के लिए प्रयास जारी रहेंगे।

घरबरा, लडपुरा, इमलियाका समेत कई गांवों के किसान पहुंचे

विधायक धीरेंद्र सिंह से मुलाकात करने वाले किसानों में घरबरा, लडपुरा, इमलियाका, कासना और पीपलका समेत कई गांवों के किसान शामिल रहे। किसानों ने अतिरिक्त मुआवजे के मुद्दे पर लंबे समय से बनी अनिश्चितता के बीच सरकार के स्पष्टीकरण को महत्वपूर्ण बताया।

किसानों को उम्मीद है कि इस निर्णय के बाद उनके लंबित दावों की जांच और निस्तारण की प्रक्रिया में तेजी आएगी। हालांकि, वास्तविक राहत इस बात पर निर्भर करेगी कि संबंधित मामलों में प्राधिकरण कब तक निर्णय लेता है और कितने किसान निर्धारित शर्तों के तहत पात्र पाए जाते हैं।

अब प्राधिकरण की कार्रवाई पर टिकी किसानों की नजरें

64.70 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजे का मामला वर्ष 2002 से 2013 के बीच अधिग्रहित जमीन से संबंधित है। लंबे समय से इस लाभ का इंतजार कर रहे किसानों के लिए अब प्राधिकरण की अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

सरकार के स्पष्टीकरण से लंबित मामलों के निस्तारण की संभावना बढ़ी है, लेकिन किसानों को वास्तविक लाभ मिलने के लिए पात्रता की जांच, दस्तावेजों का सत्यापन और नियमानुसार अंतिम निर्णय आवश्यक होगा। ऐसे में अब किसानों की नजरें प्राधिकरण की कार्रवाई और मुआवजे से जुड़े दावों के समयबद्ध निस्तारण पर टिकी हैं।


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