SIR Protest और ‘शिव की बारात’ में क्या है समानता?, राहुल गांधी ने अपने संबोधन में क्या कहा

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (12 October 2026): दिल्ली में SIR के विरोध को लेकर सियासी हलचल के बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने अपने आंदोलन को भगवान शिव के तांडव से जोड़ते हुए एक अलग अंदाज में अपनी बात रखी। सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च करने से पहले कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस ब्रीफिंग के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि यह आंदोलन एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें हर कदम पहले से तय नहीं होता। उन्होंने इसे ‘शिव का डांस’ बताते हुए कहा कि आंदोलन की दिशा परिस्थितियों के अनुसार बदलती रहती है। राहुल गांधी के इस बयान ने प्रेस ब्रीफिंग के दौरान सबका ध्यान खींचा, क्योंकि उन्होंने राजनीतिक विरोध और प्रतिरोध की रणनीति को धार्मिक प्रतीक के माध्यम से समझाने की कोशिश की। उनके मुताबिक, आंदोलन का मकसद स्पष्ट है और उसे आगे बढ़ाने के लिए हर बार पहले से योजना बनाना जरूरी नहीं है।

राहुल गांधी ने कहा, “यह तांडव है। यह ‘शिव का डांस’ है। इसमें कोई प्लानिंग नहीं होती।” उन्होंने आगे कहा कि आज वे सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) जा रहे हैं और अगले दिन आंदोलन का स्वरूप कुछ और हो सकता है। उनके अनुसार, विचार और उद्देश्य पहले से स्पष्ट हैं, लेकिन उन्हें हासिल करने के लिए हर कदम की विस्तृत योजना बनाना जरूरी नहीं है। राहुल गांधी ने कहा कि आंदोलन में परिस्थितियों के अनुसार फैसले लिए जाते हैं और उसी के मुताबिक आगे बढ़ा जाता है। उन्होंने अपने बयान में इस बात पर जोर दिया कि प्रतिरोध केवल किसी तय कार्यक्रम या रणनीति के आधार पर नहीं चलता, बल्कि उसमें लोगों की भागीदारी, परिस्थितियों की समझ और उद्देश्य के प्रति प्रतिबद्धता भी महत्वपूर्ण होती है।

प्रेस ब्रीफिंग के दौरान राहुल गांधी ने आकाशवाणी भवन के पास हुए पिछले विरोध प्रदर्शन का उदाहरण भी दिया। उन्होंने सवाल किया कि क्या उस प्रदर्शन की पहले से कोई विस्तृत योजना बनाई गई थी। राहुल गांधी के मुताबिक, शुरुआती विचार बस में जाने, वहां बैठने और गिरफ्तारी देने का था, लेकिन जब पुलिस ने आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी तो योजना बदल दी गई। उन्होंने कहा कि इसके बाद जो परिणाम सामने आया, वह पहले से बनाई गई योजना से आया या परिस्थितियों के अनुसार लिए गए फैसलों से, इस पर विचार किया जाना चाहिए। इस उदाहरण के जरिए उन्होंने यह समझाने की कोशिश की कि विरोध प्रदर्शनों में हर परिस्थिति का अनुमान पहले से लगाना संभव नहीं होता और कई बार मौके पर लिए गए फैसले आंदोलन की दिशा तय करते हैं।

राहुल गांधी ने आंदोलन को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ते हुए कहा कि यह भगवान शिव की बारात की तरह है, जिसमें कोई भी शामिल हो सकता है। उन्होंने कहा, “हिंदुस्तान दिल के साथ रेसिस्ट करता है, हिंदुस्तान प्लान के साथ रेसिस्ट नहीं करता।” राहुल गांधी ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका प्रतिरोध जारी है और आगे भी जारी रहेगा। SIR के विरोध से जुड़े इस बयान में उन्होंने आंदोलन को केवल राजनीतिक कार्यक्रम के रूप में नहीं, बल्कि लोगों की भावनाओं और भागीदारी से जुड़े प्रयास के रूप में पेश किया। अब सुप्रीम कोर्ट की ओर प्रस्तावित मार्च और SIR से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष की आगे की रणनीति पर राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा बनी रहने की संभावना है।


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