नोएडा में सेफ सिटी परियोजना को मिलेगी रफ्तार, 217 करोड़ रुपये से लगेंगे 2,200 कैमरे

टेन न्यूज नेटवर्क

Noida News (12/10/2026): नोएडा में सार्वजनिक सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने और अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से लंबे समय से लंबित सेफ सिटी परियोजना को अब गति मिलने की उम्मीद है। करीब छह साल से अटकी इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत शहर के प्रमुख मार्गों, संवेदनशील स्थानों और विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्रों में लगभग 2,200 आधुनिक कैमरे लगाए जाएंगे। परियोजना पर करीब 217 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का प्रस्ताव है। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इच्छुक कंपनियां 25 अक्टूबर तक आवेदन कर सकेंगी। प्राधिकरण की योजना आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद लगभग एक महीने के भीतर कार्यदायी कंपनी का चयन करने की है।

परियोजना के धरातल पर उतरने के बाद नोएडा में निगरानी व्यवस्था को तकनीकी रूप से अधिक सक्षम बनाने के साथ-साथ पुलिस की प्रतिक्रिया प्रणाली को भी मजबूत किया जा सकेगा। अधिकारियों के अनुसार, अगले साल की शुरुआत से शहर में कैमरे लगाने का काम शुरू होने की संभावना है।

सेक्टर-94 में बनेगा अत्याधुनिक कंट्रोल रूम

सेफ सिटी योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा सेक्टर-94 में स्थित इंटीग्रेटेड सिक्योरिटी ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ISTMS) परिसर में नया कंट्रोल रूम स्थापित करना है। इस केंद्र को मौजूदा निगरानी व्यवस्था के साथ एकीकृत किया जाएगा, जिससे अलग-अलग स्थानों से मिलने वाली सूचनाओं का समन्वित तरीके से उपयोग किया जा सकेगा।

योजना के अंतर्गत ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र को भी इस प्रणाली से जोड़ने की व्यवस्था प्रस्तावित है। इसके अतिरिक्त, कंट्रोल रूम को पुलिस मुख्यालय के नियंत्रण केंद्र से सीधे जोड़ा जाएगा। इससे किसी आपराधिक घटना, संदिग्ध गतिविधि या अन्य आपात स्थिति की सूचना मिलने पर संबंधित थाने, पुलिस चौकी, पुलिस रिस्पॉन्स व्हीकल (PRV) और डायल-112 सेवा तक तत्काल जानकारी पहुंचाने में मदद मिलेगी।

फेस डिटेक्शन तकनीक से संदिग्धों की पहचान में मिलेगी मदद

प्रस्तावित कैमरा नेटवर्क में फेस डिटेक्शन जैसी आधुनिक तकनीक शामिल करने की योजना है। इसके जरिए पुलिस के रिकॉर्ड में दर्ज अपराधियों की पहचान करने में सहायता मिल सकेगी। संबंधित व्यक्ति कैमरे की निगरानी में आने पर सिस्टम उसके चेहरे का उपलब्ध रिकॉर्ड से मिलान कर सकेगा। पहचान संबंधी सूचना कंट्रोल रूम तक पहुंचाने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।

इस तकनीक से पुलिस को संदिग्ध व्यक्तियों की गतिविधियों पर नजर रखने और जरूरत के अनुसार संबंधित इकाइयों को सतर्क करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, ऐसी पहचान की सटीकता और प्रभावशीलता उपलब्ध रिकॉर्ड, तकनीकी व्यवस्था तथा सत्यापन प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।

1,700 मीटर तक जूम करने वाले कैमरे भी होंगे शामिल

परियोजना में पैन-टिल्ट-जूम (PTZ) कैमरे लगाने का भी प्रावधान है। इन कैमरों को जरूरत के अनुसार अलग-अलग दिशाओं में घुमाया जा सकेगा और दूर स्थित किसी स्थान पर जूम करके निगरानी की जा सकेगी। उपलब्ध परियोजना विवरण के अनुसार, इन कैमरों से लगभग 1,700 मीटर तक जूम करके फुटेज देखने की सुविधा प्रस्तावित है।

इस व्यवस्था से प्रमुख सड़कों, बड़े चौराहों और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर निगरानी की क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। साथ ही, किसी घटना के बाद फुटेज की जांच कर घटनाक्रम को समझने और जांच एजेंसियों को जरूरी जानकारी उपलब्ध कराने में भी यह प्रणाली उपयोगी हो सकती है।

टेंडर प्रक्रिया में कंपनियों के सुझावों के बाद बढ़ी समयसीमा

प्राधिकरण के अधिकारियों के मुताबिक, सेफ सिटी परियोजना के लिए जारी रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) पर चर्चा करने के लिए 17 सितंबर को संबंधित एजेंसियों के साथ बैठक की गई थी। बैठक के दौरान कंपनियों ने परियोजना की शर्तों और तकनीकी प्रावधानों को लेकर सुझाव दिए थे। इन सुझावों के आधार पर शुद्धिपत्र जारी कर निविदा दस्तावेज में आवश्यक बदलाव किए गए। इसी प्रक्रिया के चलते आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख बढ़ाकर 25 अक्टूबर कर दी गई।

प्री-बिड बैठक में भी इच्छुक कंपनियों ने कार्यक्षेत्र, पात्रता संबंधी शर्तों, तकनीकी मानकों और परियोजना पूरी करने की समयसीमा से जुड़े सवाल उठाए। अधिकारियों ने अधिकांश सवालों का जवाब बैठक के दौरान दिया। अब आवेदन प्राप्त होने के बाद तकनीकी और अन्य निर्धारित मानकों के आधार पर कंपनी के चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

डिजाइन से लेकर रखरखाव तक की जिम्मेदारी परियोजना में शामिल

यह परियोजना केवल कैमरे लगाने तक सीमित नहीं होगी। इसके दायरे में कैमरों का डिजाइन तैयार करना, जरूरी उपकरणों की आपूर्ति, स्थापना, संपूर्ण सिस्टम को चालू करना और उसके रखरखाव की व्यवस्था करना भी शामिल है। ऐसे में चयनित कंपनी की जिम्मेदारी निगरानी नेटवर्क को कार्यशील बनाए रखने और निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप व्यवस्था विकसित करने की होगी।

शहर की सुरक्षा व्यवस्था को एकीकृत करने की दिशा में अहम कदम

नोएडा में सेफ सिटी परियोजना का उद्देश्य विभिन्न सार्वजनिक स्थानों की निगरानी को एक केंद्रीय व्यवस्था से जोड़ना और पुलिस को समय पर सूचना उपलब्ध कराने की क्षमता बढ़ाना है। यदि परियोजना निर्धारित समयसीमा के अनुसार आगे बढ़ती है, तो इससे अपराध की जांच, संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी और आपात स्थितियों में पुलिस के समन्वय को मजबूती मिल सकती है।

हालांकि, परियोजना का वास्तविक लाभ कैमरों की स्थापना, नेटवर्क की विश्वसनीयता, कंट्रोल रूम के प्रभावी संचालन और पुलिस की त्वरित कार्रवाई पर निर्भर करेगा। फिलहाल कंपनी का चयन और उसके बाद काम शुरू होने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण चरण हैं।


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