किसान नेताओं के घरों पर पुलिस तैनाती से बढ़ा विवाद, किसान संघर्ष मोर्चा ने उठाए संवैधानिक अधिकारों पर सवाल
टेन न्यूज नेटवर्क
Greater Noida News (09/10/2026): गौतमबुद्ध नगर में किसान संघर्ष मोर्चा से जुड़े नेताओं के आवासों पर पुलिसकर्मियों की तैनाती को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। किसान नेताओं ने इस कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे नागरिकों की स्वतंत्रता और निजता से जुड़ा गंभीर मामला बताया है। उनका आरोप है कि जनपद में किसी वीआईपी के आगमन या संभावित आंदोलन की आशंका के आधार पर किसान नेताओं को बार-बार उनके घरों तक सीमित रखने जैसी स्थिति पैदा की जाती है। किसान संघर्ष मोर्चा ने पुलिस प्रशासन से इस कार्रवाई का स्पष्ट कारण बताने और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का सम्मान सुनिश्चित करने की मांग की है।
किसान संघर्ष मोर्चा की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, शुक्रवार सुबह से ही किसान सभा के जिला अध्यक्ष डॉ. रुपेश वर्मा के आवास सहित सोरन प्रधान, सुखबीर खलीफा और किसान संगठनों से जुड़े अन्य नेताओं के घरों पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। किसान नेताओं का कहना है कि उनकी ओर से न तो दिल्ली के जंतर-मंतर पर और न ही गौतम बुद्ध नगर में किसी आंदोलन का ऐलान किया गया था। इसके बावजूद पुलिस की तैनाती किए जाने से वे नाराज हैं।
बिना आंदोलन की घोषणा के पुलिस तैनाती पर उठाए सवाल
किसान सभा के जिला अध्यक्ष डॉ. रुपेश वर्मा ने पुलिस की इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक नागरिक को संविधान के तहत स्वतंत्रता और अन्य मौलिक अधिकार प्राप्त हैं। उनके मुताबिक, किसी प्रस्तावित आंदोलन की आधिकारिक घोषणा नहीं होने के बावजूद किसान नेताओं के आवासों पर पुलिस तैनात करना कई सवाल खड़े करता है।
उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन को किसी भी प्रकार की कार्रवाई करते समय स्पष्ट कानूनी आधार और संवैधानिक प्रावधानों का ध्यान रखना चाहिए। किसान नेताओं का आरोप है कि इस तरह की कार्रवाई से उनकी स्वतंत्र आवाजाही और निजी जीवन प्रभावित होता है। हालांकि, पुलिस प्रशासन की ओर से इस तैनाती के कारणों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
सोरन प्रधान बोले—असहमति की आवाज को दबाने के बजाय संवाद जरूरी
किसान एकता संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सोरन प्रधान ने किसान नेताओं के घरों पर पुलिस तैनात किए जाने की निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि किसान नेताओं के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई बार-बार की जा रही है और इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।
सोरन प्रधान के अनुसार, लोकतंत्र में विरोध दर्ज कराना और अपनी मांगों को सरकार तथा प्रशासन के सामने रखना नागरिकों का अधिकार है। ऐसे मामलों में टकराव की स्थिति पैदा करने के बजाय संवाद के माध्यम से समाधान तलाशा जाना चाहिए। उन्होंने पुलिस प्रशासन से किसान संगठनों के प्रति उचित व्यवहार करने और लोकतांत्रिक गतिविधियों के लिए अनुकूल माहौल बनाए रखने की मांग की।
सुखबीर खलीफा ने कार्रवाई तत्काल रोकने की मांग की
किसान परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखबीर खलीफा ने भी किसान नेताओं के आवासों पर पुलिस की तैनाती पर आपत्ति जताई। उन्होंने इसे नागरिकों के बुनियादी अधिकारों से जुड़ा विषय बताते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्रवाई के पीछे का आधार स्पष्ट किया जाना चाहिए।
उन्होंने मांग की कि यदि किसी किसान नेता के खिलाफ कोई विशिष्ट कानूनी कार्रवाई आवश्यक है, तो उसे नियमानुसार किया जाए। साथ ही, बिना स्पष्ट कारण ऐसी कार्रवाई किए जाने पर रोक लगाई जाए और नागरिकों की स्वतंत्रता तथा निजता का सम्मान सुनिश्चित किया जाए।
मौलिक अधिकारों के मुद्दे पर हाईकोर्ट जाने की तैयारी
किसान परिषद के राष्ट्रीय महासचिव सचिन एडवोकेट ने कहा कि किसान नेताओं के आवासों पर पुलिस की तैनाती और नागरिकों के मौलिक अधिकारों के कथित उल्लंघन का मामला कानूनी रूप से उठाया जाएगा। उन्होंने जानकारी दी कि इस संबंध में माननीय उच्च न्यायालय में रिट याचिका दाखिल करने की प्रक्रिया चल रही है।
उनके मुताबिक, न्यायालय के समक्ष मामले को रखकर नागरिकों के अधिकारों की रक्षा और ऐसी कार्रवाई के कानूनी आधार पर स्थिति स्पष्ट कराने का प्रयास किया जाएगा।
किसान संघर्ष मोर्चा ने प्रशासन के सामने रखीं मांगें
किसान संघर्ष मोर्चा ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि किसान नेताओं के आवासों पर पुलिस तैनात किए जाने का कारण सार्वजनिक किया जाए और इस तरह की कार्रवाई के लिए स्पष्ट कानूनी आधार सुनिश्चित किया जाए। संगठन ने लोकतांत्रिक विरोध, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नागरिकों की निजता का सम्मान करने की भी अपील की है।
फिलहाल, इस मामले में किसान नेताओं की ओर से लगाए गए आरोपों पर पुलिस प्रशासन का पक्ष सामने आना बाकी है। ऐसे में कार्रवाई की वास्तविक परिस्थितियों और उसके आधार को लेकर स्थिति संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
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