Delhi House Collapse: सत्य निकेतन में रातभर चला रेस्क्यू, 6 लोगों की मौत
टेन न्यूज़ नेटवर्क
New Delhi News (07 September 2026): दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर पांच मंजिला पीजी इमारत के अचानक ढह जाने से बड़ा हादसा हो गया। इमारत में बड़ी संख्या में छात्र रहते थे और हादसे के बाद कई लोग मलबे के नीचे फंस गए। हादसे में अब तक 6 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। एम्स के मुताबिक, ट्रॉमा सेंटर में कुल 10 लोगों को लाया गया था, जिनमें पांच को मृत अवस्था में अस्पताल पहुंचाया गया, जबकि गंभीर रूप से घायल एक अन्य व्यक्ति ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। तीन घायलों का इलाज जारी है, जबकि एक व्यक्ति को मामूली चोटों के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
हादसे की सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस, एनडीआरएफ, दिल्ली फायर सर्विस और दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी की टीमें मौके पर पहुंचीं और बड़े स्तर पर बचाव अभियान शुरू किया। रेस्क्यू ऑपरेशन की निगरानी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने की। एनडीआरएफ की दो टीमें मलबे में फंसे लोगों की तलाश में लगातार जुटी रहीं। अंधेरा होने के बावजूद रातभर अभियान जारी रखा गया और मलबे के अंदर फंसे लोगों तक सांस लेने के लिए ऑक्सीजन पहुंचाने के इंतजाम भी किए गए। राहत एवं बचाव दलों ने अत्याधुनिक उपकरणों की मदद से मलबे को सावधानीपूर्वक हटाया, ताकि अंदर मौजूद किसी व्यक्ति को नुकसान न पहुंचे।
रेस्क्यू ऑपरेशन के शुरुआती दौर में स्थानीय लोग भी प्रशासन और बचाव दलों के साथ आगे आए। आसपास मौजूद लोगों ने अपने स्तर पर हाथों और उपलब्ध औजारों की मदद से मलबा हटाने की कोशिश की। इसके बाद फायर सर्विस, पुलिस और एनडीआरएफ की टीमें व्यवस्थित तरीके से मलबा हटाने और संभावित लोगों की लोकेशन तलाशने में जुट गईं। मौके पर फायर टेंडर और कैट्स एंबुलेंस भी तैनात किए गए, ताकि मलबे से किसी व्यक्ति के बाहर निकलते ही उसे तत्काल चिकित्सा सहायता मिल सके। रातभर चले अभियान के दौरान बचावकर्मी बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करते रहे।
सत्य निकेतन हादसे ने दिल्ली में पीजी और किराये के मकानों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस इमारत में छात्र रह रहे थे, उसके ढहने के बाद प्रशासन अब आसपास की इमारतों की स्थिति और निर्माण नियमों के पालन की जांच कर रहा है। हादसे में जान गंवाने वालों के परिवारों में मातम है, वहीं रेस्क्यू टीमों की कोशिश है कि मलबे में अगर कोई और व्यक्ति फंसा हो तो उसे जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। यह हादसा राजधानी में जर्जर और असुरक्षित इमारतों की समय रहते पहचान और उन पर कार्रवाई की जरूरत को एक बार फिर सामने लाता है।
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